भारत में मासिक सक्रिय गिग वर्कर्स 2030 तक 1.7–2.1 करोड़ पहुंचने का अनुमान

Redseer के अनुसार भारत की मासिक सक्रिय गिग वर्कफोर्स मौजूदा 60 लाख से बढ़कर 2030 तक 1.7–2.1 करोड़ हो सकती है। डिलीवरी, राइड-हेलिंग और होम सर्विसेज प्लेटफॉर्म गैर-कृषि रोजगार अंतर को भरने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

— Source publishedThu, 30 Jul, 2026, 15:26 IST·First seen Thu, 30 Jul, 2026, 16:00 IST·Source Business Today · Latest

What happened

India gig economy · Redseer forecasts India’s monthly active gig workforce could rise from over 6 million to 17-21 million by 2030. Delivery, ride-hailing and

Key facts

  • More than 6 million monthly active gig workers currently
  • 17-21 million monthly active gig workers projected by 2030
  • Gig platforms could address about 70% of the annual non-farm job gap by 2030
  • About 8 million new non-farm jobs needed annually
  • Over 90% of workers work under 40 hours a week
  • Average worker is active about three months a year
  • 54% had no paid work before joining platforms
  • Average gig earnings: Rs 138 per hour versus Rs 54 for comparable work
  • Home-services monthly earnings: Rs 70,000-80,000
  • Ride-hailing monthly earnings: Rs 37,000-39,000
  • Delivery monthly earnings: Rs 22,000-23,000

Why this matters

बढ़ती गिग श्रम उपलब्धता के बीच कंपनियों को क्षेत्रीय डिलीवरी नेटवर्क, वर्कर-टेक स्टैक और होम-सर्विस प्रदाताओं में साझेदारी या अधिग्रहण के जरिए तेजी से स्केल करने के अवसर तलाशने चाहिए।

What to watch

  • मासिक सक्रिय गिग वर्कर्स के मुकाबले प्रति वर्कर ऑर्डर और प्रभावी प्रति घंटे कमाई का रुझान।
  • डिलीवरी पार्टनर अट्रिशन, लॉग-इन घंटे, इंसेंटिव-निर्भरता और पीक-टाइम सेवा उपलब्धता।
  • टियर-2/3 शहरों में क्विक कॉमर्स, फूड डिलीवरी और होम-सर्विस ऑर्डर वृद्धि।
  • राज्य सरकारों के गिग-वर्कर कल्याण बोर्ड, सेस, बीमा या न्यूनतम पारिश्रमिक संबंधी नियम।
  • ग्राहक डिलीवरी शुल्क, सदस्यता अपनाने और छोटे-कार्ट ऑर्डर की लाभप्रदता में बदलाव।
  • राइड-हेलिंग और डिलीवरी प्लेटफॉर्मों में मूल्य युद्ध या इंसेंटिव कटौती के संकेत।
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों में मांग-घनत्व के आधार पर हाइपरलोकल डिलीवरी और सेवा नेटवर्क विस्तार की योजना बनाएं।
  • वर्कर अधिग्रहण से अधिक रिटेंशन पर ध्यान दें: पारदर्शी कमाई डैशबोर्ड, त्वरित भुगतान, बीमा, कौशल प्रशिक्षण और पीक-आवर गारंटी लागू करें।
  • ऑर्डर बैचिंग, रूट ऑप्टिमाइजेशन और मांग-पूर्वानुमान से प्रति डिलीवरी लागत घटाएं, क्योंकि श्रम आपूर्ति बढ़ने के बावजूद ग्राहक अधिग्रहण लागत ऊंची रह सकती है।
  • गिग श्रम पर निर्भरता को श्रेणियों के अनुसार अलग करें; उच्च-फ्रीक्वेंसी डिलीवरी में फ्लेक्सिबल पूल और संवेदनशील/उच्च-मूल्य सेवाओं में प्रशिक्षित अर्ध-स्थायी नेटवर्क रखें।
  • संभावित श्रम-सुरक्षा नियमों के लिए प्रति ऑर्डर सोशल-सिक्योरिटी योगदान, बीमा और अनुपालन लागत का अग्रिम मॉडल तैयार करें।